चंडीगढ़, 29 अप्रैल
(रूपेश कुमार )। हरियाणा और पंजाब सरकार में भाखड़ा नहर के पानी को लेकर टकराव हो गया है। पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने भाखड़ा नहर से हरियाणा को मिलने वाले पानी में कमी कर दी है। पहले हरियाणा को रोजाना साढ़े 9 हजार क्यूसिक पानी मिल रहा था। अब इसे घटाकर 4 हजार क्यूसिक कर दिया है। इस फैसले पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि हमारे पास हरियाणा को देने के लिए एक बूंद भी ज्यादा पानी नहीं है। हरियाणा सरकार 2 महीने पहले ही अपने कोटे का सारा पानी इस्तेमाल कर चुकी है। CM भगवंत मान ने आगे कहा- अगर केंद्र सरकार को जरूरत है तो पाकिस्तान जाने से जो पानी रोका है, वह पंजाब के डैम में भर दें, हम उसे आगे हरियाणा को दे देंगे। वहीं, पंजाब सरकार के इस फैसले पर हरियाणा सरकार ने कड़ी आपत्ति जताते हुए शर्तों के हिसाब से पानी देने को कहा है।
पंजाब और हरियाणा सरकार में 1981 में पानी का समझौता हुआ था। इसके तहत भाखड़ा नहर से पंजाब हरियाणा और राजस्थान को पानी देता है। अभी तक पंजाब हरियाणा को डेली साढ़े 9 हजार क्यूसिक पानी दे रहा था, जिसे 15 दिन पहले से घटाकर 4 हजार क्यूसिक कर दिया गया है।
. पानी की कमी से हरियाणा पर क्या असर होगा?
पंजाब सरकार की इस कटौती का असर हरियाणा में पेयजल और सिंचाई पर पड़ेगा। प्रदेश के 5 जिलों में पानी को लेकर संकट पैदा हो सकता है। इनमें हिसार, फतेहाबाद, सिरसा, रोहतक, महेंद्रगढ़ शामिल हैं। इन जिलों को पंजाब की भाखड़ा नहर से आने वाले पानी से ही आपूर्ति मिलती है।
हरियाणा CM ने इस मामले में क्या किया?
हरियाणा के CM नायब सैनी ने इसे लेकर पंजाब CM भगवंत मान से बात की है। हरियाणा सरकार से जुड़े सोर्सेस के मुताबिक, CM सैनी ने पंजाब CM मान को कहा है कि यह फैसला ठीक नहीं है। जल्द ही उन्हें हरियाणा को शर्तों के हिसाब से पूरा पानी देना पड़ेगा।


