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Wednesday, February 25, 2026

जागरूकता से ही आपदा से बचाव हो सकता है – डॉ एमपी सिंह

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सरकार के दिशा निर्देशों की पालना से जान माल के नुकसान से बचा जा सकता है -डॉ एमपी सिंह
फरीदाबाद। फरीदाबाद सिविल डिफेंस के चीफ वार्डन डॉ एमपी सिंह ने बाढ़ आपदा को मध्येनजर रखते हुए जगमाल एंक्लेव में आइडियल पब्लिक स्कूल के 650 विद्यार्थियों और 25 अध्यापकों को बाढ़ आपदा प्रबंधन के तरीकों से अवगत कराया।

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डॉ एमपी सिंह ने बताया एक महीने पूर्व हिमाचल और उत्तराखंड में भारी बरसात होने की बजह से हथिनीकुंड बैराज से यमुना नदी में 3 लाख 29 हजार क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया था जिसकी वजह से यमुना नदी का जल स्तर बढ़ गया फिर भी भारी बरसात एनसीआर में होती रही और धीमे-धीमे ओखला बैराज से भी पानी छोड़े जाने लगा जिससे स्माइलपुर, गड्ढा कॉलोनी, बसंतपुर, ददसिया, राजपुर कला, भोपनी, कबूलपुर, चीरसी, चांदपुर, अरुणा, लतीपुर दुल्हेपुर, शाहपुर, मंझावली, मोठूका, मोहना, छायंसा आदि गांव प्रभावित हो गए।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में सरकार के द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों की पालना करनी चाहिए पालना न करने पर हादसे हो सकते हैं। ऐसा भोपनी गांव में देखा गया तीन बच्चे बाढ़ के पानी का जायजा लेने पहुंच गए और स्नान करने लगे जहां पर एक बच्चे की डूबने से मौत हो गई और दो बच्चों को बचा लिया गया। ठीक इसी पकार
तीन बच्चे जन्मदिन मनाने के लिए घर से निकलें और बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में पहुंच गए वहां पर तीनों बच्चे डूब गए जिसमें से एक बच्चे की डेड बॉडी मिल गई और दो की अभी तलाश है। ठीक इसी प्रकार बसंतपुर के एक घर के चार सदस्यों को बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में बने मकान में से निकाल लिया लेकिन दो आदमी उसमें से बाहर निकल कर नहीं आये और कुछ दिन के बाद पता चला कि अधिक पानी के बहाव से वह डूब गए बाद में एसडीआरएफ की टीम ने उनकी डेड बॉडी को निकाल लिया ।ऐसा ही मोहना गांव में देखने को मिला कि एक 38 वर्ष का जवान अपने बच्चों को बाढ़ का दृश्य दिखाने के लिए लेकर आता है और वहां पर किसी कारण से वह बाढ़ वाले पानी में गिर जाता है जिससे उसकी मौत हो जाती है और उसका परिवार बिलखता रह जाता।
उक्त उदाहरणों से पता चलता है कि कहीं ना कहीं हमारी लापरवाही या अज्ञानता सामने आती है यदि बच्चे बाढ़ के पानी का जायजा लेने नही जाते तो उनकी मौत नहीं होती यदि दोनों व्यक्ति अपने परिवार के साथ नाव में बैठकर आ जाते तो उनकी भी मौत नहीं होती यदि बच्चे जन्मदिन मनाते समय नदी मे नहीं उतरते तो उनकी भी मौत नहीं होती।
कहने का भाव यह है कि पानी बिजली और आग से नहीं खेलना चाहिए इसमें अनेकों खतरे होते हैं बाढ़ के पानी में अच्छे-अच्छे तरह की भी डूब जाते हैं जब भीषण आग लग रही होती है तो कुछ लोग जलकर तो कुछ लोग धुएं से बेहोश होकर मर जाते हैं और जब गीले हाथों से बिजली प्रवाह होने वाले यंत्र को छू लेते हैं तो बिजली पकड़ लेती है कई लोग डरते नहीं है और बिजली चोरी करने के लिए घर के ऊपर से जा रही तारों में कुंडी डाल देते हैं जिससे पहले कई हादसे हो चुके हैं अब भी अवैध कॉलोनी में बिजली के खंभे नहीं है वहां पर खुली तारे डंडे और बल्ली पर चल रही है कोई भी उनसे बिजली लेते समय बिजली की चपेट में आ जाता है और जल कर मर जाता है।
इस अवसर पर डॉ एमपी सह ने घायलों की प्राथमिक सहायता, दम घुटने का इलाज, जलने का इलाज, बिजली के पकड़ने पर सीपीआर देकर बचाने के तरीकों से अवगत कराया तथा उनको नजदीकी अस्पताल पहुंचाने के तरीके बताएं।
इस अवसर पर विद्यालय के चेयरमैन राकेश भढ़ाना, प्रधानाचार्य रमन कुमार, कोऑर्डिनेटर पूजा व अन्य अध्यापक मुख्य रूपस उपस्थित रहे।

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