फरीदाबाद। जिला विधिक सेवाएँ प्राधिकरण, फरीदाबाद की ओर से “नई दिशा, नई उड़ान” अभियान के अंतर्गत बाल अधिकारों पर एक बैठक/प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम माननीय श्री संदीप गर्ग, जिला एवं सत्र न्यायाधीश-cum-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवाएँ प्राधिकरण, फरीदाबाद के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर श्रीमती रितु यादव, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी-cum-सचिव, जिला विधिक सेवाएँ प्राधिकरण, फरीदाबाद मुख्य अतिथि तथा श्री सौरभ शर्मा, प्रधान न्यायाधीश, किशोर न्याय बोर्ड, फरीदाबाद विशिष्ट अतिथि रहे।

कार्यक्रम में स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (SJPU) के अधिकारी, स्कूलों व कॉलेजों के लीगल लिटरेसी इंचार्ज, जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU), बाल कल्याण समिति (CWC), ऑब्जर्वेशन होम व प्लेस ऑफ सेफ्टी के अधीक्षक, तथा बाल देखभाल संस्थानों (CCI) के प्रभारी शामिल हुए।
श्री सौरभ शर्मा ने उपस्थित प्रतिभागियों को किशोर न्याय अधिनियम के सिद्धांतों जैसे निर्दोष मानना, गरिमा के साथ समानता, सहभागिता, गोपनीयता आदि के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अधिनियम में अपराधों को लघु, गंभीर और जघन्य श्रेणियों में बाँटा गया है और जघन्य अपराधों में प्राथमिकी (FIR) दर्ज किया जाना अनिवार्य है।
श्रीमती रीता यादव, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने 2015 में किए गए संशोधन की जानकारी दी, जिसके अनुसार 16 से 18 वर्ष के किशोर द्वारा जघन्य अपराध किए जाने पर, प्रारंभिक जाँच के बाद यदि वह परिपक्व पाया जाता है तो मामला चिल्ड्रन कोर्ट में भेजा जाता है और वहाँ वयस्क की तरह सुनवाई होती है। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड आयु प्रमाण नहीं है, इसलिए पुलिस अधिकारियों को चाहिए कि वे जन्म प्रमाणपत्र या स्कूल प्रमाणपत्र प्रस्तुत करें। उन्होंने विशेष रूप से यह भी कहा कि POCSO मामलों में स्कूलों के लीगल लिटरेसी इंचार्ज का कर्तव्य है कि वे तुरंत सूचना दें, अन्यथा सूचना न देने पर उन पर कार्यवाही हो सकती है।
कार्यक्रम के अंत में श्री रविन्दर गुप्ता, मुख्य विधिक सहायता प्रतिरक्षा अधिवक्ता, जिला विधिक सेवाएँ प्राधिकरण, फरीदाबाद ने सभी अतिथियों, पुलिस अधिकारियों, लीगल लिटरेसी इंचार्ज, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष एवं सभी संस्थानों के प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।
यह कार्यक्रम सभी प्रतिभागियों के लिए उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ और इससे यह संदेश गया कि समाज के सभी जिम्मेदार वर्ग मिलकर बच्चों के अधिकारों की रक्षा करें और किशोर न्याय अधिनियम का सही पालन सुनिश्चित करे

