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Friday, March 20, 2026

आमजन के संयुक्त प्रयासों से ही बाल विवाह की कुप्रथा पर लगेगा पूर्ण अंकुश: एडीसी

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ग्राम सरपंचों को बाल विवाह न करने के लिए चलाई गयी जागरुकता मुहिम मे शामिल कर शपथ दिलाई

फरीदाबाद, 29 अप्रैल
(रूपेश कुमार )
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बाल विवाह करने के खिलाफ चल रही जागरूकता मुहीम के तहत आज मंगलवार को अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) साहिल गुप्ता के मार्गदर्शन में जिला के विभिन्न गाँव के सरपंचों को बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ जागरूक कर अपने गाँव मे बाल विवाह न करवाने की शपथ दिलाई गयी। साथ ही उनसे आग्रह किया कि गाँव मे अगर किसी का बाल विवाह होता है तो उसको रुकवाए या उसकी जानकारी संबंधित अधिकारी को दे जानकारी देने वाले व्यक्ति का नाम गुप्त रखा जाएगा।

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संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी हेमा कौशिक ने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के अंतर्गत 18 वर्ष से कम आयु की लड़कियों और 21 वर्ष से कम आयु के लड़कों का विवाह अवैध माना गया है। इसके तहत बाल विवाह कराने वालों पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि “बाल विवाह केवल एक सामाजिक समस्या नहीं है, बल्कि यह बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को भी बाधित करता है। यह शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन के अन्य अवसरों को प्रभावित करता है। हम सभी को मिलकर इस कुप्रथा को समाप्त करने के लिए कदम उठाने होंगे।

उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा बच्चों की शिक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कई योजनाएं चल रही हैं, लेकिन समाज की जागरूकता और सहयोग के बिना इसे खत्म करना मुश्किल है। बच्चों का शिक्षा प्राप्त करना, उनका मानसिक और शारीरिक विकास सुनिश्चित करना, समाज की जिम्मेदारी है। जब तक समाज बाल विवाह जैसी प्रथाओं के खिलाफ जागरूक नहीं होगा, तब तक इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता।

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